बलौदाबाजार : आजीविका और नैसर्गिक पर्यटन विकास के अध्ययन के लिए समितियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
बलौदाबाजार : आजीविका और नैसर्गिक पर्यटन विकास के अध्ययन के लिए समितियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
बलौदाबाजार : आजीविका और नैसर्गिक पर्यटन विकास के अध्ययन के लिए समितियों ने किया शैक्षणिक भ्रमण
जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों का किया अवलोकन
बलौदाबाजार, 24 मार्च 2026
बलौदाबाजार वनमण्डल के विभिन्न ग्रामों के पारिस्थितिकी विकास समिति और संयुक्त वन प्रबंधन सदस्यों का आजीविका और नैसर्गिक पर्यटन विकास संबधी शैक्षणिक भ्रमण संपन्न हुआ। 19 मार्च से 21 मार्च 2026 तक आयोजित इस दौरे में वनांचल क्षेत्र के कृषकों, गाइड्स और समिति सदस्यों ने छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों का अध्ययन किया।
कांगेर घाटी टाइगर रिजर्व में प्रतिभागियों ने यहाँ जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों और उन्नत कृषि पद्धतियों का बारीकी से अवलोकन किया। इसके साथ ही, कांगेर घाटी टाइगर रिजर्व में नैसर्गिक पर्यटन प्रबंधन और समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल को समझा गया। डेब्रीगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य (ओडिशा) में प्रतिभागियों के दल ने वन्यजीव संरक्षण, संवर्धन और ईको-टूरिज्म के सफल मॉडलों का अध्ययन किया। सदस्यों ने सीखा कि कैसे पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व (मध्य प्रदेश) में भ्रमण में ग्रामीणों ने विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व के पर्यटन प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण की कार्यप्रणाली को देखा। यहाँ उन्होंने संरक्षण और पर्यटन के बीच बेहतर संतुलन बनाने के गुर सीखे।
इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों और गाइडों को अन्य सफल क्षेत्रों के 'बेस्ट प्रैक्टिसेस' से अवगत कराना था। इससे प्राप्त अनुभवों का उपयोग अब बारनवापारा और बलौदाबाजार के अन्य वन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, उन्नत कृषि और बेहतर पर्यटन सेवाओं को विकसित करने के लिए किया जाएगा।भ्रमण से लौटे सदस्यों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस यात्रा से उन्हें प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और स्वरोजगार के नए तरीकों को समझने में बहुत मदद मिली है।
वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर कहा कि यह शैक्षणिक यात्रा वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सीखने का अवसर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भ्रमण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाएंगे और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाएंगे ।
cgns